Header Ads

ad728
  • Breaking News

    यूपी में शिक्षकों के दो लाख पद खाली हैं

    उत्तर प्रदेश : भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के लगभग सात हजार प्राथमिक विद्यालयों में ताला लगा हुआ है जबकि 15 हजार से अधिक विद्यालय ऐसे हैं जहां एक ही शिक्षक है.





    ऐसा नहीं है कि यह स्थिति दो-चार महीने से ही हो बल्कि पूरे चार वर्षों से प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती नहीं हुई है. राज्य के दो लाख से अधिक पद खाली हैं.  देश के बाकी हिस्से में दो से तीन बार शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) का आयोजन हो चुका, कई प्रदेशों में इसके आधार पर नियुक्तियां भी हो गईं लेकिन उत्तर प्रदेश में अब तक कुछ साफ नहीं है.


    केवल प्राथमिक ही नहीं, माध्यमिक स्कूलों में भी चयन का हाल बेहद खराब है. अनेक विद्यालयों में साइंस, मैथ्स, अंग्रेजी के शिक्षक नहीं हैं. अब सुप्रीम कोर्ट ने छह माह में भर्ती का आदेश दिया है तो अभिभावकों को उम्मीद जगी है कि उनके बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सकती है.


     हालांकि प्रदेश में जो हालात हैं, सरकार यदि तत्काल पदों की घोषणा कर दे तो भी छह महीने में चयन पूरा हो पाना मुश्किल लगता है. माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड में अध्यक्ष और सदस्यों के पद खाली हैं. शिक्षकों की भर्ती के लिए पहले इन पदों पर तैनाती करनी होगी. उसके बाद विद्यालयों से रिक्तियां मांगी जाएंगी, उनके अनुरूप विज्ञापन होगा, परीक्षा होगी, साक्षात्कार होगा तब जाकर चयन संभव है, जो छह माह में पूरा होना असंभव है.


     टीईटी का आवेदन इसी माह प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों के चयन को लेकर सरकार पूरी तैयारी के दावे कर रही है. तैयारी है कि आठ अक्तूबर को विज्ञापन जारी किया जाएगा लेकिन इसे लेकर इतने विवाद हैं कि जब तक चयन हो न जाए, कुछ कहना मुश्किल है.

    स्थिति यह है कि अकेले इलाहाबाद में ही 335 विद्यालयों में ताले लगे हैं जबकि 1074 विद्यालय एक शिक्षक के सहारे चल रहे हैं. सरकार ने भर्ती की जो प्रक्रिया अपनाई है, उसमें छह माह की तो केवल ट्रेनिंग दी जानी है. ऐसे में छह माह की अवधि में चयन कैसे संभव है.


    स्पष्ट है सरकार को अपनी शिक्षा नीति में बदलाव लाना ही होगा.यह देखना ही होगा कि छात्रों काजो कि देश का भविष्य कहे जाते हैं उनका ही भविष्य खतरे में है.

    No comments

    Post Top Ad

    ad728

    Post Bottom Ad

    ad728