Header Ads

ad728
  • Breaking News

    तुम बसी हो कण कण अंदर माँ


    तुम बसी हो कण कण अंदर
    तुम बसी हो कण कण अंदर माँ, हम ढूढंते रह गये मंदिर में |
    हम मूढमति हम अनजाने माँ सार, तुम्हारा क्या जाने || तुम बसी.......





    तेरी माया को ना जान सके, तुझको ना कभी पहचान सके |
    हम मोह की निंद्रा सोये रहे, माँ इधर उधर ही खोये रहे |
    तू सूरज तू ही चंद्रमा, हम ढूढंते रह गये मंदिर में || तुम बसी हो कण कण अंदर
    हर जगह तुम्हारे डेरे माँ, कोइ खेल ना जाने तेरे माँ |
    इन नैनों को ना पता लगे, किस रुप में तेरी ज्योत जगे |
    तू परवत तु ही समंदर माँ, हम ढूढंते रह गये मंदिर में || तुम बसी हो कण कण अंदर
    कोइ कहता तुम्ही पवन में हो, और तुम्ही ज्वाला अगन में हो |
    कहते है अंबर और जमी, तुम सब कुछ हो हम कुछ भी नहीं
    फल फुल तुम्ही तरुवर माँ, हम ढुढंते रह गये मंदिर में || तुम बसी हो कण कण अंदर
    तुम बसी हो कण कण अंदर माँ, हम ढुढंते रह गये मंदिर में |
    हम मूढमति हम अज्ञानी, माँ सार तुम्हारा क्या जाने ||

    No comments

    Post Top Ad

    ad728

    Post Bottom Ad

    ad728